RISE OF POLITICS
Saturday, 9 November 2024
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Tuesday, 5 November 2024
HINDU KATENGE TOH RASHTRA KATEGA LIKE PAKISTAN BANGLADESH AFGHANISTAN
Wednesday, 12 January 2022
saadho man ka maan tiyaago sukh dukh donon sam kari jaane , aur maan apamaana harakh sog te rahe ateeta , tin jag tat
रात्रि प्रार्थना
साधो मन का मान तियागो
काम क्रोध संगत दुरजन की ,
ताते अहनिस भागो |
साधो मन का मान तियागो
सुख दुख दोनों सम करि जाने ,
और मान अपमाना
हरख सोग ते रहे अतीता ,
तिन जग तत पिछाना ||
उसतत निन्दा दोउ तियागे ,
खोजै पद निरवाणा
जन नानक इह खेल कठिन है ,
किनहुं गुरुमुख जाना ॥
साधो मन का मान तियागो
#saadho man ka #maan #tiyaago kaam krodh sangat durajan kee , taate ahanis bhaago | saadho man ka maan tiyaago sukh dukh donon sam kari jaane , aur maan apamaana harakh sog te rahe ateeta , tin jag tat #pichhaana || usatat ninda dou tiyaage , khojai pad niravaana jan naanak ih khel kathin hai , kinahun #gurumukh jaana . saadho man ka maan tiyaago
Translation
Sadho's mind, tiyago kama anger, compatible with the evil, tate ahnis run away. Sadhno mind tiyago happiness and sorrow, both are equal, and respect and disrespect Harkh Sog te rahe pasta, three worlds tat pichhana || Usat blasphemy dou tiyage, search for pada nirvana Jan Nanak, this game is difficult, why should I go to Gurmukh? Tiego the honor of a pure mind
1.https://youtu.be/xBERN90ZFjY
2.https://youtu.be/3a06SrSHjpg
3.https://youtu.be/CyO8ocQkmck
4.https://youtu.be/D1Hx_A3TagI
5.https://youtu.be/241HqC9FqMs
6.https://youtu.be/b0UWFT1h1Ww
Tuesday, 2 June 2020
2/6/2020 SACH KA SAMNA FACT & Truth of POLITICS
2/6/2020 NEHRU 1ST PM OF INDEPENDENT INDIA नेहरू जी की पत्नियां RELATIONSHIP OF NEHRU
Friday, 29 May 2020
29/5/2020 WHAT HAPPENS TO HINDU. अरे हिन्दू किसे भूल गये धर्मरक्षको को....
डोरवेल बहुत ही संकोच में बजाई गयी थी,
तो मैं चौंका!!
कौन होगा..?🤔
दाई, नौकर, ड्राइवर,धोबी, दादा,
या सब्जी वाला!!
सबकी डोरवेल बजाने की स्टाइल अलग अलग ही होती है।
वैसे भी 45 दिन से अधिक चल रहे अज्ञातवास में न कोई दोस्त आ रहे न कोई रिश्तेदार।
गेट पर जाकर देखा तो मोहल्ले के मंदिर के पुजारी वयोवृद्ध पंडित जी खड़े थे।
चरण स्पर्श भी नहीं कर सकते थे,
(social distance जो मेंटेन करना था)
सो ससंकोच दूर से ही करबद्ध सादर प्रणाम किया।
उन्होंने आशीर्वाद देते हुये पुराने किन्तु साफ-सुथरे थैले से मंदिर का प्रसाद निकाल कर दिया।
हम दोनों मुँह में गमछा लपेटे एक दूसरे को देख रहे थे।
पंडित जी ने कहा कि अक्षय तृतीया भी व्यतीत हो गयी, आज मंगलवार था,
पर आप नहीं आए।
हमने वर्तमान परिस्थिति स्पष्ट करते हुये समझाना चाहा कि स्थिति आप देख ही रहे हैं। अब तो भगवान जब सब ठीक ठाक करेंगे तभी आना होगा।
तभी पंडित जी ने मुँह से अपना गमछा हटाया, वे धीरे-धीरे सुबकते हुये बोले कि आप लोगों के दान और चढ़ावे से ही मेरे परिवार का भरण पोषण होता है.....एक महीने से सब बंद है...भूखों मरने की नौबत है।
हमलोगों के लिए अन्य कोई व्यवस्था नहीं है........हमें भूख नहीं लगती है क्या??
हम भी आपके धार्मिक मजदूर ही तो हैं😢
हम उद्विग्न हो उठे......अपने परिवार को कोरोना से सुरक्षित रखने की चिंताओं के बीच इनकी चिंता ही हमें नहीं रही।
हमने उन्हें शाब्दिक सान्त्वना देते हुये...घर के अंदर आने का आग्रह किया।
सूखे कपोलों में ढलके आँसू पोंछते हुये...पंडित जी ने स्वल्पाहार लेने से मना कर दिया..
बोले👇
घर में सब #भूखे बैठे हैं, मैं कैसे खा लूँ ?
हमने तत्काल मोहल्ले की परचून के दूकानदार को फोनकर महीने भर का राशन पुजारी जी के यहांँ पहुँचाने का आग्रह किया तो पुजारी जी संतुष्ट हुये।
हजारों आशीष देते हुये बार बार पीछे मुड़ मुड़कर हमें कृतज्ञ नेत्रों से देखते हुये पुजारी जी वापस जा रहे थे ।
धर्म वाहकों का भी ध्यान रखें....सड़क चलते राहगीरों से हाथ फैलाकर भिक्षा माँगने के लिए इन्हें विवश न करें।
मदरसों के #मौलवियों की तरह कोई सरकार इन्हें वेतन नहीं देती।
हमारे आपके आश्रय स ही इनका परिवार भी पलता है।
जय सियाराम । 🙏
🌹 *जय सनातन धर्म की जय । 🌹
डोरवेल बहुत ही संकोच में बजाई गयी थी,
तो मैं चौंका!!
कौन होगा..?🤔
दाई, नौकर, ड्राइवर,धोबी, दादा,
या सब्जी वाला!!
सबकी डोरवेल बजाने की स्टाइल अलग अलग ही होती है।
वैसे भी 45 दिन से अधिक चल रहे अज्ञातवास में न कोई दोस्त आ रहे न कोई रिश्तेदार।
गेट पर जाकर देखा तो मोहल्ले के मंदिर के पुजारी वयोवृद्ध पंडित जी खड़े थे।
चरण स्पर्श भी नहीं कर सकते थे,
(social distance जो मेंटेन करना था)
सो ससंकोच दूर से ही करबद्ध सादर प्रणाम किया।
उन्होंने आशीर्वाद देते हुये पुराने किन्तु साफ-सुथरे थैले से मंदिर का प्रसाद निकाल कर दिया।
हम दोनों मुँह में गमछा लपेटे एक दूसरे को देख रहे थे।
पंडित जी ने कहा कि अक्षय तृतीया भी व्यतीत हो गयी, आज मंगलवार था,
पर आप नहीं आए।
हमने वर्तमान परिस्थिति स्पष्ट करते हुये समझाना चाहा कि स्थिति आप देख ही रहे हैं। अब तो भगवान जब सब ठीक ठाक करेंगे तभी आना होगा।
तभी पंडित जी ने मुँह से अपना गमछा हटाया, वे धीरे-धीरे सुबकते हुये बोले कि आप लोगों के दान और चढ़ावे से ही मेरे परिवार का भरण पोषण होता है.....एक महीने से सब बंद है...भूखों मरने की नौबत है।
हमलोगों के लिए अन्य कोई व्यवस्था नहीं है........हमें भूख नहीं लगती है क्या??
हम भी आपके धार्मिक मजदूर ही तो हैं😢
हम उद्विग्न हो उठे......अपने परिवार को कोरोना से सुरक्षित रखने की चिंताओं के बीच इनकी चिंता ही हमें नहीं रही।
हमने उन्हें शाब्दिक सान्त्वना देते हुये...घर के अंदर आने का आग्रह किया।
सूखे कपोलों में ढलके आँसू पोंछते हुये...पंडित जी ने स्वल्पाहार लेने से मना कर दिया..
बोले👇
घर में सब #भूखे बैठे हैं, मैं कैसे खा लूँ ?
हमने तत्काल मोहल्ले की परचून के दूकानदार को फोनकर महीने भर का राशन पुजारी जी के यहांँ पहुँचाने का आग्रह किया तो पुजारी जी संतुष्ट हुये।
हजारों आशीष देते हुये बार बार पीछे मुड़ मुड़कर हमें कृतज्ञ नेत्रों से देखते हुये पुजारी जी वापस जा रहे थे ।
धर्म वाहकों का भी ध्यान रखें....सड़क चलते राहगीरों से हाथ फैलाकर भिक्षा माँगने के लिए इन्हें विवश न करें।
मदरसों के #मौलवियों की तरह कोई सरकार इन्हें वेतन नहीं देती।
हमारे आपके आश्रय स ही इनका परिवार भी पलता है।
जय सियाराम । 🙏
🌹 *जय सनातन धर्म की जय । 🌹